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अफरोज अंसारी की संघर्ष और सफलता की कहानी, डीसी आलोक कुमार ने किया सम्मानित।

अफरोज अंसारी की संघर्ष और सफलता की कहानी, डीसी आलोक कुमार ने किया सम्मानित।

जामताड़ा (Jharkhand) : ‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’ इस कहावत को अक्षरशः सच कर दिखाया है झारखंड के जामताड़ा जिले के एक छोटे से ग्राम पंचायत चेंगाईडीह के रहने वाले एक होनहार छात्र अफरोज अंसारी ने।

जिला स्तर पर लहराया परचम 
जब मैट्रिक परीक्षा का परिणाम आया, तो अफरोज की मेहनत रंग लाई। उन्होंने न सिर्फ प्रथम श्रेणी हासिल की, बल्कि अपने पूरे जिले में टॉप (डिस्ट्रिक्ट टॉपर) कर सबको हैरान कर दिया। यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं थी, बल्कि विपरीत परिस्थितियों के खिलाफ अफरोज की जीत की घोषणा थी।

‘दैनिक जागरण जीनियस अवार्ड 2026’ से सम्मान

अफरोज की इस असाधारण प्रतिभा और संघर्ष को सलाम करते हुए दैनिक जागरण की ओर से उन्हें ‘जीनियस अवार्ड 2026’ के लिए चुना गया।
जामताड़ा में आयोजित एक भव्य समारोह में जामताड़ा के उपायुक्त आलोक कुमार के द्वारा अफरोज को मंच पर बुलाकर मेडल और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया। जब अफरोज के गले में मेडल पहनाया गया, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह पल उस दिवंगत पिता के लिए एक सच्ची श्रद्धांजलि था, जो आज जहां कहीं भी होंगे, अपने बेटे की इस कामयाबी पर गर्व कर रहे होंगे।

सीख : हौसला हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं

अफरोज अंसारी की यह कहानी हमें सिखाती है कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर आपके इरादे मजबूत हैं और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। चेंगाईडीह जैसे छोटे से गांव से निकलकर जिला टॉपर बनने वाले अफरोज आज जामताड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं।

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