भीषण जलसंकट से बेहाल नाला की जनता, सरकार-विपक्ष दोनों बेपरवाह, शांति गोपाल महतो ने साधा निशाना।
जामताड़ा (झारखण्ड) : भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच नाला विधानसभा क्षेत्र के कई गांव गंभीर जलसंकट से जूझ रहे हैं। चापाकल सूख चुके हैं और लाखों की लागत से बने जलमीनार शोपीस बने हुए हैं। इस हालात पर पूर्व विधायक प्रत्याशी सह ह्यूमन राइट एंड जस्टिस मूवमेंट के प्रदेश सचिव शांति गोपाल महतो ने सरकार और विपक्ष दोनों पर तीखा हमला बोला है।
महतो ने कहा कि एक तरफ आम नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार राज्यसभा चुनाव के अंकगणित में उलझी हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जल ही जीवन है, जल है तो कल है। मगर यहां तो पानी के लिए हाहाकार मचा है। जनता को बुनियादी सुविधा तक नसीब नहीं हो रही। सेवा ही धर्म है और कर्म ही पूजा है, लेकिन सरकार इसे भूल गई है।
पीएचईडी विभाग पर उठाए सवाल
शांति गोपाल महतो ने पीएचईडी विभाग के पदाधिकारियों से जमीन पर उतरकर वस्तुस्थिति देखने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में चापाकल और बड़े-बड़े जलमीनार तो हैं, लेकिन अधिकतर बेकार पड़े हैं। इस चिलचिलाती धूप में लोग पानी के लिए तड़प रहे हैं। अधिकारियों को सरजमीं पर आकर देखना चाहिए कि हालात कितने बदतर हैं।
महतो ने स्थानीय भाजपा नेताओं को भी आड़े हाथों लिया।नाला की देवतुल्य जनता ने मजबूत विपक्ष के रूप में भाजपा को बहुमूल्य मत दिया था। मगर जनता की समस्या के समाधान के लिए कोई पहल नहीं दिख रही। जनता इसे बारीकी से देख रही है और खुद को ठगा महसूस कर रही है।
महतो ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से इस गंभीर समस्या का तुरंत समाधान करने की मांग की है।