प्रख्यात कांस्य मूर्तिकार डॉ. राजस्थापति कालियप्पा गौंडर, जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। पाँच दशकों से अधिक की गौरवशाली कलात्मक यात्रा रही है। 100 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार किया और 50 से अधिक मूर्तिकारों को प्रशिक्षित किया तथा अपनी कला को कांस्य से पत्थर एवं सीमेंट की कलाकृतियों तक बढ़ाया गया है।