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विद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं, छात्राओं का भविष्य कीचड़ में फंसने को मजबूर

No road to reach the school; female students' futures forced to get stuck in the mud.

कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय तालझारी में विद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं, छात्राओं का भविष्य कीचड़ में फंसने को मजबूर

साहिबगंज (झारखण्ड) : शिक्षा को बढ़ावा देने और बालिकाओं को बेहतर भविष्य देने के उद्देश्य से संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, तालझारी आज भी मूलभूत सड़क सुविधा से वंचित है। विद्यालय तक पहुंचने के लिए कोई समुचित पक्की सड़क नहीं होने के कारण छात्राओं, शिक्षकों एवं अभिभावकों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पूरा मार्ग कीचड़ एवं जलजमाव से भर जाता है और विद्यालय तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं रहता। इसकी आवाज अभाविप के कार्यकर्ता प्रदेश एस एफ एस सह संयोजक गौरव कुमार सुमन ने उठाया।

बताया कि विद्यालय परिसर का भवन एवं शैक्षणिक वातावरण तो विकसित है, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता बदहाल स्थिति में है। यह विडंबना है कि जिस विद्यालय में सैकड़ों बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर अपने भविष्य का निर्माण कर रही हैं, वहां तक जाने के लिए आज भी एक बेहतर सड़क उपलब्ध नहीं है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं, अभिभावकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि बारिश के समय छात्राओं को फिसलन भरे और कीचड़युक्त रास्ते से होकर विद्यालय आना-जाना पड़ता है। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में वाहन भी विद्यालय तक नहीं पहुंच पाते हैं, जिससे छात्राओं की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
अभिभावक एवं क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकार द्वारा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन विद्यालय तक पहुंचने वाली सड़क की उपेक्षा समझ से परे है। यदि शीघ्र सड़क निर्माण नहीं कराया गया तो बरसात के मौसम में छात्राओं की शिक्षा एवं सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
छात्र संगठन , सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग एवं जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, तालझारी तक अविलंब पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि छात्राओं को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। “जहां बेटियां शिक्षा का उजाला फैला रही हैं, वहां तक पहुंचने का रास्ता अंधेरे और बदहाली में नहीं रहना चाहिए।”

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