जामताड़ा (Jharkhand) : नाला प्रखंड मुख्यालय स्थित दलाबड़ काली मंदिर परिसर में चल रहे महाशक्ति महायज्ञ और सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथामृत ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया है। दो दिन से जारी इस अनुष्ठान में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
आयोजन की दूसरी रात्रि को श्रीधाम वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथावाचक धर्मप्राण हिरण्मय गोस्वामी महाराज ने कथा सुनाई। उन्होंने राजा परीक्षित को सात दिन में मृत्यु का श्राप और नारद के उपदेश प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।
कथा का सार
महाराज ने बताया कि एक बार राजा परीक्षित शिकार के लिए वन गए। प्यास लगने पर वे जल की खोज में भटकते हुए शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। ऋषि ध्यान में लीन थे। जल न मिलने और कलियुग के प्रभाव से राजा को क्रोध आ गया। उन्होंने पास पड़े मरे हुए सर्प को धनुष की नोक से उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया और लौट गए।
जब ऋषि पुत्र श्रृंगी को यह पता चला तो उन्होंने क्रोध में कमंडल का जल लेकर राजा को श्राप दे दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग उन्हें डस लेगा। समाधि टूटने पर शमीक ऋषि को जब बात पता चली तो वे बहुत दु:खी हुए। उन्होंने पुत्र को समझाया कि राजा भगवद्भक्त हैं और अनजाने में यह कृत्य हुआ है। राजा के न रहने से राज्य में अधर्म फैल जाएगा। राजमहल लौटकर मुकुट उतारते ही कलियुग का प्रभाव हटते ही राजा परीक्षित को अपनी भूल का बोध हुआ। श्राप का समाचार सुनकर उन्होंने कहा कि ऋषिकुमार ने मुझ पर उपकार किया। पापी को दंड मिलना ही चाहिए। शेष सात दिन उन्होंने भागवत श्रवण और भक्ति में बिताने का संकल्प लिया। कथावाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता मनुष्य को कर्मयोगी बनने की प्रेरणा देती है। कथा सुनने दलाबड़ और आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर देर रात तक भक्ति और शांति के माहौल से गूंजता रहा।