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लगेगा देश का पहला अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन पायलट प्रोजेक्ट।

The country's first underground coal gasification pilot project will be set up in Kasta-Palashthali, the drain will get a new identity.

कास्ता–पलास्थली में लगेगा देश का पहला अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन पायलट प्रोजेक्ट, नाला को नई पहचान मिलेगी।

जामताड़ा (झारखण्ड) : जामताड़ा जिले के नाला विधानसभा क्षेत्र के कास्ता–पलास्थली इलाके में बंद पड़ी पूर्व ईस्टर्न कोलफ़ील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की कोयला खदानों में देश का पहला अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन (यूसीजी) पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी तेज हुई है। इस पहल के पीछे मुख्य रूप से झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष व नाला विधायक रवींद्रनाथ महतो का लगातार प्रयास और समन्वय बताया जा रहा है।
हाल ही में विधानसभा में अध्यक्ष की अध्यक्षता में सीएमडी और तकनीकी टीम के साथ उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें परियोजना की तकनीकी रूपरेखा, पर्यावरणीय प्रभाव, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और भविष्य की औद्योगिक संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि परियोजना में स्थानीय युवाओं एवं प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता दी जाए।

क्या है यूसीजी?

अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन (यूसीजी) एक आधुनिक तकनीक है जिसमें जमीन के भीतर मौजूद कोयले को खोदकर निकाले बिना ही रासायनिक प्रक्रियाओं से गैस में बदला जाता है। प्राप्त गैस का उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक और रासायनिक उद्योगों तथा औद्योगिक ईंधन के रूप में किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक खनन की तुलना में यह तकनीक संसाधनों के उपयोग को अधिक कारगर बना सकती है और बंद खदानों के पुन: उपयोग से पर्यावरणीय लाभ भी मिल सकते हैं।

प्रभाव और योजनाएँ

परियोजना से क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। अध्यक्ष श्री महतो ने कहा कि यदि पायलट सफल हुआ तो नाला और आसपास के क्षेत्रों के हजारों युवा स्थानीय स्तर पर ही स्थायी नौकरियाँ और प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने परियोजना को स्थानीय उद्योग और निवेश को आकर्षित करने का अवसर भी बताया।
स्थानीय लोगों में उम्मीद और उत्साह है कि यह परियोजना केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक स्वरूप को बदल कर औद्योगिक विकास और समृद्धि का मार्ग खोल सकती है। अधिकारियों ने परियोजना के लिए आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति, सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्थानीय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो की पहल से यह परियोजना नाला को राज्य और देश के मानचित्र पर नए पहचान के रूप में स्थापित कर सकती है। परियोजना की अगली औपचारिक प्रक्रियाएँ और परीक्षण शीघ्र ही शुरू होने की संभावना है।

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