देहरादून (उत्तराखंड) : पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन मंगलवार 19 मई को करीब 11 बजे की सुबह हुआ। वह 91 वर्ष के थे और उन्होंने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं के कारण इलाज चल रहा था। उनके निधन पर उत्तराखंड सरकार ने सम्मान में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की हैं।
भुवन चंद्र खंडूड़ी को सार्वजनिक जीवन में उनकी ईमानदारी, कड़े अनुशासन और साफ-सुथरी राजनीति के लिए ‘जनरल साहब’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स में लगभग 36 वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में एक रेजिमेंटल कमांडर के रूप में भाग लिया था।
सेना में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 1983 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया था और वह मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार मार्च 2007 से जून 2009 और दूसरी बार सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक सुधारों, वीआईपी सुरक्षा में कटौती और पारदर्शिता लाने के लिए मजबूत लोकायुक्त कानून की पैरवी जैसे कई कड़े फैसले लिए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री (2000-2004) रहे।
देश के चार बड़े महानगरों को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ (Golden Quadrilateral) राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को जमीन पर उतारने का मुख्य श्रेय उन्हीं को जाता है।
उनके परिवार में उनकी पत्नी अरुणा खंडूड़ी, बेटा मनीष खंडूड़ी और बेटी ऋतु खंडूड़ी भूषण ( वर्तमान उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष ) हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और देश-प्रदेश के तमाम नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्र और उत्तराखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।